“उत्तर प्रदेश में जन धन योजना के तहत 2025 में लाखों नए बैंक खाते खोले गए, जो वित्तीय समावेशन को बढ़ावा दे रहे हैं। योजना के 11 साल पूरे होने पर, यूपी में 56 करोड़ से अधिक खातों में ₹2.68 लाख करोड़ जमा हुए। महिलाओं और ग्रामीण क्षेत्रों में खातों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।”
उत्तर प्रदेश में जन धन योजना: नए खातों का रिकॉर्ड
उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) ने वित्तीय समावेशन के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। 28 अगस्त 2014 को शुरू हुई इस योजना ने 2025 तक 56.21 करोड़ से अधिक बैंक खाते खोलने में सफलता हासिल की है, जिसमें से उत्तर प्रदेश का योगदान उल्लेखनीय है। यूपी में लाखों नए खाते खोले गए, जो ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में वित्तीय सेवाओं तक पहुंच को बढ़ा रहे हैं।
वित्त मंत्रालय के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, PMJDY के तहत यूपी में 37.52 करोड़ खाते ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में हैं, जबकि 18.69 करोड़ खाते शहरी क्षेत्रों में खोले गए हैं। इनमें से 31.33 करोड़ खाते महिलाओं के नाम पर हैं, जो योजना की समावेशी प्रकृति को दर्शाता है। कुल जमा राशि ₹2,65,503.09 करोड़ तक पहुंच चुकी है, जिसमें यूपी का हिस्सा लगभग 29% है।
2024-25 में, उत्तर प्रदेश में 33 लाख नए खाते जोड़े गए, जो पिछले वर्ष की तुलना में खातों की संख्या में 18% की वृद्धि दर्शाता है। औसत जमा राशि भी ₹4,524 प्रति खाते तक पहुंच गई है, जो वित्तीय जागरूकता और बचत की आदत को दर्शाती है। योजना के तहत प्रदान किए जाने वाले RuPay डेबिट कार्ड की संख्या 38.71 करोड़ तक पहुंच गई है, जिसमें से 80% खाते सक्रिय हैं।
PMJDY ने उत्तर प्रदेश में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) को मजबूत किया है। 2024-25 में, DBT के माध्यम से लगभग ₹6.9 लाख करोड़ की राशि लाभार्थियों के खातों में हस्तांतरित की गई। यह योजना न केवल बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच प्रदान करती है, बल्कि ₹2 लाख का दुर्घटना बीमा, ₹30,000 का जीवन बीमा (2014-15 में खोले गए खातों के लिए), और ₹10,000 तक की ओवरड्राफ्ट सुविधा भी देती है।
यूपी में 13.55 लाख बैंक मित्र (Bank Mitras) ग्रामीण क्षेत्रों में शाखा-रहित बैंकिंग सेवाएं प्रदान कर रहे हैं, जिससे दूरदराज के इलाकों में भी लोग वित्तीय सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं। योजना ने महिलाओं और हाशिए पर रहने वाले समुदायों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया है। 55.5% खाते महिलाओं के नाम पर हैं, और 67% खाते ग्रामीण/अर्ध-शहरी क्षेत्रों में खोले गए हैं।
हालांकि, कुछ चुनौतियां भी हैं। विपक्ष ने आरोप लगाया है कि कई खाते निष्क्रिय हैं, और 20% खातों में कोई लेन-देन नहीं होता। इसके बावजूद, केंद्र सरकार ने 2.7 लाख ग्राम पंचायतों में सैचुरेशन कैंप आयोजित किए, जहां नए खाते खोले गए और KYC अपडेट की गई। यूपी में यह अभियान विशेष रूप से प्रभावी रहा, जहां हर घर में कम से कम एक बैंक खाता सुनिश्चित करने का लक्ष्य लगभग पूरा हो चुका है।
योजना की सफलता का श्रेय जन धन-आधार-मोबाइल (JAM) त्रिमूर्ति को जाता है, जिसने सब्सिडी वितरण को पारदर्शी और रिसाव-मुक्त बनाया है। डिजिटल लेनदेन में भी भारी वृद्धि हुई है, जिसमें UPI ट्रांजैक्शन FY19 में 535 करोड़ से बढ़कर FY25 में 18,587 करोड़ तक पहुंच गए।
उत्तर प्रदेश में PMJDY ने न केवल वित्तीय समावेशन को बढ़ावा दिया है, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया है कि गरीब और हाशिए पर रहने वाले लोग आर्थिक मुख्यधारा से जुड़ें। यह योजना यूपी के लोगों के लिए वित्तीय स्वतंत्रता और सशक्तिकरण का प्रतीक बन चुकी है।
Disclaimer: यह लेख वित्त मंत्रालय, PIB, और अन्य विश्वसनीय समाचार स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर आधारित है। आंकड़े 20 अगस्त 2025 तक के हैं। व्यक्तिगत वित्तीय निर्णय लेने से पहले बैंक या संबंधित प्राधिकरण से सलाह लें।