“उत्तर प्रदेश सरकार की कैशलेस मिशन पहल के तहत छोटे व्यापारियों और वेंडर्स को यूपीआई प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। यह कार्यक्रम डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने, नकदी पर निर्भरता कम करने और वित्तीय समावेशन को मजबूत करने का लक्ष्य रखता है। 2025 में यूपी के लाखों वेंडर्स को प्रशिक्षित करने की योजना है।”
उत्तर प्रदेश में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा: वेंडर्स के लिए यूपीआई प्रशिक्षण
उत्तर प्रदेश सरकार ने कैशलेस मिशन के तहत एक महत्वाकांक्षी पहल शुरू की है, जिसका उद्देश्य राज्य के छोटे व्यापारियों, स्ट्रीट वेंडर्स और दुकानदारों को यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के उपयोग में प्रशिक्षित करना है। यह पहल डिजिटल इंडिया के दृष्टिकोण को साकार करने और ग्रामीण व अर्ध-शहरी क्षेत्रों में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई है।
प्रशिक्षण का उद्देश्य और महत्व
यूपी सरकार का लक्ष्य है कि 2025 के अंत तक राज्य के कम से कम 10 लाख वेंडर्स को यूपीआई के उपयोग में प्रशिक्षित किया जाए। यह प्रशिक्षण छोटे व्यवसायों को डिजिटल भुगतान स्वीकार करने में सक्षम बनाएगा, जिससे नकदी लेनदेन की आवश्यकता कम होगी और पारदर्शिता बढ़ेगी। यूपीआई, जिसे नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने 2016 में शुरू किया था, भारत में डिजिटल भुगतान का सबसे लोकप्रिय साधन बन चुका है। अगस्त 2025 में, यूपीआई ने 20 अरब लेनदेन दर्ज किए, जो कुल ₹25 लाख करोड़ के बराबर थे।
प्रशिक्षण कार्यक्रम की रूपरेखा
यूपी के विभिन्न जिलों में प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें वेंडर्स को यूपीआई ऐप्स जैसे PhonePe, Google Pay, Paytm और BHIM के उपयोग की जानकारी दी जा रही है। इन शिविरों में वेंडर्स को निम्नलिखित सिखाया जाता है:
यूपीआई आईडी और क्यूआर कोड सेटअप करना।
सुरक्षित लेनदेन के लिए यूपीआई पिन का उपयोग।
ग्राहकों से डिजिटल भुगतान स्वीकार करने की प्रक्रिया।
लेनदेन की स्थिति जांचने और रिकॉर्ड रखने के तरीके।
प्रशिक्षण में विशेष ध्यान उन वेंडर्स पर है जो स्मार्टफोन या डिजिटल तकनीक से अपरिचित हैं। इसके लिए स्थानीय भाषाओं में गाइड और हैंड्स-ऑन सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में UPI 123PAY और UPI Lite जैसे फीचर्स को बढ़ावा दिया जा रहा है, जो बिना इंटरनेट के भी भुगतान संभव बनाते हैं।
महिलाओं और छोटे व्यापारियों पर विशेष ध्यान
यह कार्यक्रम विशेष रूप से महिला वेंडर्स को सशक्त बनाने पर केंद्रित है। कोलकाता और बेंगलुरु में किए गए एक हालिया अध्ययन के अनुसार, यूपीआई ने महिला वेंडर्स के लिए व्यवसाय को आसान बनाया है, लेकिन उन्हें तकनीकी प्रशिक्षण की कमी का सामना करना पड़ता है। यूपी सरकार इस अंतर को पाटने के लिए महिलाओं के लिए विशेष कार्यशालाएं आयोजित कर रही है, ताकि वे डिजिटल भुगतान की प्रक्रिया को समझ सकें और स्वतंत्र रूप से इसका उपयोग कर सकें।
चुनौतियां और समाधान
हालांकि यूपीआई को अपनाने की दर तेजी से बढ़ रही है, लेकिन कुछ चुनौतियां भी सामने आई हैं। बेंगलुरु में हाल ही में कुछ वेंडर्स ने यूपीआई के बजाय नकदी को प्राथमिकता दी, क्योंकि उन्हें जीएसटी नोटिस और टैक्स जांच का डर था। यूपी सरकार इस समस्या को हल करने के लिए वेंडर्स को जीएसटी नियमों के बारे में जागरूक कर रही है और उन्हें आश्वासन दे रही है कि छोटे लेनदेन पर कोई अतिरिक्त कर नहीं लगेगा। इसके अलावा, तकनीकी समस्याओं जैसे खराब इंटरनेट कनेक्टिविटी और लेनदेन विफलता को कम करने के लिए बैंकों के साथ साझेदारी की जा रही है।
प्रोत्साहन और लाभ
सरकार ने छोटे व्यापारियों को प्रोत्साहित करने के लिए कई कदम उठाए हैं। 2024-25 के लिए ₹1,500 करोड़ की प्रोत्साहन योजना के तहत, ₹2,000 तक के यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) शून्य रखा गया है और 0.15% का प्रोत्साहन दिया जा रहा है। यह योजना विशेष रूप से छोटे वेंडर्स को डिजिटल भुगतान अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है। इसके अलावा, डिजिटल लेनदेन से वेंडर्स को नकदी प्रबंधन की लागत कम करने और ग्राहकों को अधिक सुविधाजनक भुगतान विकल्प प्रदान करने में मदद मिल रही है।
भविष्य की योजनाएं
यूपी सरकार का लक्ष्य है कि 2026 तक राज्य के सभी छोटे व्यापारी और वेंडर्स डिजिटल भुगतान में पारंगत हो जाएं। इसके लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों को और विस्तार दिया जाएगा, विशेष रूप से टियर-3 और टियर-4 शहरों में। NPCI के साथ साझेदारी में, यूपीआई सर्कल जैसे नए फीचर्स को बढ़ावा दिया जा रहा है, जो छोटे व्यवसायों को अपने कर्मचारियों को डिजिटल भुगतान की सुविधा देने में मदद करता है।
Disclaimer: यह लेख समाचार, सरकारी रिपोर्ट्स, और हाल के अध्ययनों पर आधारित है। जानकारी की सटीकता के लिए संबंधित बैंकों और NPCI की आधिकारिक वेबसाइट्स की जांच करें।