हिमाचल प्रदेश की हिम भोग योजना 2025 में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए नए अवसर ला रही है। हिम मक्की आटा लॉन्च के साथ, सरकार किसानों को 30 रुपये प्रति किलो मक्का और 60 रुपये प्रति किलो गेहूं की MSP दे रही है। यह योजना युवाओं को रोजगार और उपभोक्ताओं को स्वास्थ्यवर्धक विकल्प प्रदान कर रही है।
हिम भोग: प्राकृतिक खेती की नई क्रांति
हिमाचल प्रदेश सरकार की हिम प्राकृतिक खेती उत्पाद योजना ने 2025 में एक नया मोड़ लिया है, जिसमें हिम भोग ब्रांड के तहत प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और किसानों की आय बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। दिसंबर 2024 में बिलासपुर में आयोजित एक समारोह में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस योजना का शुभारंभ किया, जिसमें हिम मक्की आटा को बाजार में उतारा गया। यह आटा 1 किलो और 5 किलो की पैकेजिंग में उचित मूल्य की दुकानों (PDS) के माध्यम से उपलब्ध है, जिससे उपभोक्ताओं को रसायन-मुक्त, स्वास्थ्यवर्धक भोजन मिल रहा है।
योजना के तहत सरकार प्राकृतिक खेती से उत्पादित मक्का को 30 रुपये प्रति किलो और गेहूं को 60 रुपये प्रति किलो की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद रही है। यह पहल न केवल किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बना रही है, बल्कि युवाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर भी पैदा कर रही है। ऊना के जिला खाद्य आपूर्ति नियंत्रक राजीव शर्मा के अनुसार, जिले के 322 डिपुओं के माध्यम से हिम भोग मक्की आटा उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जा रहा है।
किसानों के लिए आर्थिक लाभ और प्रोत्साहन
हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं। प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना के तहत, सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती विधि को अपनाया जा रहा है, जिसमें रासायनिक खाद और कीटनाशकों का उपयोग नहीं होता। इसके बजाय, जीवामृत, बीजामृत और अग्नि अस्त्र जैसे जैविक इनपुट्स का उपयोग किया जाता है। यह विधि न केवल मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती है, बल्कि खेती की लागत को 46% तक कम करती है और किसानों के लाभ में 22% की वृद्धि करती है।
ऊना के उपायुक्त जतिन लाल ने कहा कि हिम भोग योजना किसानों के हितों को संरक्षित करने में कारगर साबित हो रही है। यह छोटे और सीमांत किसानों, विशेष रूप से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों के लिए लाभकारी है। योजना के तहत सरकार प्रति परिवार 20 क्विंटल अनाज की खरीद सुनिश्चित कर रही है, जिससे किसानों को स्थिर आय मिल रही है।
हिम उन्नति योजना का समर्थन
हिम भोग योजना को हिम उन्नति योजना का भी समर्थन प्राप्त है, जिसे 2023 में शुरू किया गया था। इस योजना के तहत, 150 करोड़ रुपये के बजट के साथ 2,600 कृषि क्लस्टर स्थापित किए जा रहे हैं, जिनमें 1,200 कृषि विभाग, 1,100 प्राकृतिक खेती इकाई और 300 जाइका द्वारा बनाए जाएंगे। इन क्लस्टरों का उद्देश्य क्षेत्र-विशिष्ट, रसायन-मुक्त खेती को बढ़ावा देना है। अब तक 286 क्लस्टर चिन्हित किए जा चुके हैं, जिनमें से 186 में खरीफ 2023 से गतिविधियां शुरू हो चुकी हैं।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि यह योजना 1.92 लाख किसानों को लाभ पहुंचाएगी, जो 32,149 हेक्टेयर भूमि पर प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। इसके अलावा, सरकार ने 10 नए किसान उत्पादक संगठन (FPO) स्थापित करने के लिए 50 करोड़ रुपये और कांटेदार तार जैसी सुविधाओं के लिए 10 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है।
स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए लाभ
प्राकृतिक खेती न केवल किसानों के लिए आर्थिक रूप से लाभकारी है, बल्कि यह पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए भी बेहतर है। सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती विधि में देसी गाय के गोबर और गोमूत्र से बने जीवामृत का उपयोग होता है, जो मिट्टी में सूक्ष्म जीवाणुओं की संख्या बढ़ाता है। इससे मिट्टी की उर्वरता और जल संग्रहण क्षमता में सुधार होता है, साथ ही खरपतवार नियंत्रण में भी मदद मिलती है।
2018-19 में शुरू हुई प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना ने 500 किसानों के लक्ष्य को पार करते हुए 54,914 किसानों को कवर किया, जो 2,451 हेक्टेयर भूमि पर खेती कर रहे थे। अब इसका लक्ष्य 20,000 हेक्टेयर तक विस्तार करना है। सर्वेक्षणों से पता चला है कि प्राकृतिक खेती से सेब के बागों में स्कैब और मार्सोनिना जैसे रोगों की दर रासायनिक खेती की तुलना में काफी कम है।
आगे की राह
हिम भोग योजना के तहत सरकार अन्य प्राकृतिक उत्पादों को भी बाजार में लाने की योजना बना रही है। इसके लिए उच्च गुणवत्ता वाले बीज, साइकिल हल, और अन्य उपकरणों पर सब्सिडी दी जा रही है। साइकिल हल पर 500 रुपये, फव्वारे पर 350 रुपये और सोलर लाइट पर 500 रुपये की सब्सिडी दी जा रही है। साथ ही, 15,000 एकड़ जमीन को प्राकृतिक खेती के लिए प्रमाणित करने के लिए एक समर्पित वेब पोर्टल बनाया जा रहा है।
Disclaimer: यह लेख प्राकृतिक खेती और हिम भोग योजना से संबंधित नवीनतम जानकारी पर आधारित है। डेटा सरकारी घोषणाओं, कृषि विभाग की वेबसाइट्स, और विश्वसनीय समाचार स्रोतों से लिया गया है। यह लेख सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और निवेश या नीति निर्णय के लिए उपयोग करने से पहले विशेषज्ञ सलाह लेने की सिफारिश की जाती है।