“हिमाचल प्रदेश में सौर ऊर्जा क्रांति की शुरुआत! प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत हर जिले में एक मॉडल सौर गांव बनेगा। शिमला और कांगड़ा में शुरू हो चुकी परियोजनाएं ग्रामीण बिजली बिल कम करेंगी और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देंगी। सब्सिडी और प्रोत्साहन से हर घर में सौर ऊर्जा की रोशनी!”
हिमाचल के गांवों में सौर ऊर्जा की नई लहर
हिमाचल प्रदेश में स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने मिलकर एक महत्वाकांक्षी कदम उठाया है। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत, प्रदेश के हर जिले में एक मॉडल सौर गांव स्थापित किया जाएगा। इस पहल का लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की खपत को कम करना, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना और ग्रामीण परिवारों को सस्ती बिजली उपलब्ध कराना है।
शिमला जिला प्रशासन ने इस योजना के तहत चार गांवों—त्यावल, चकडेल, नेरवा और सुंडा भौरा—को शॉर्टलिस्ट किया है, जिनमें से एक को मॉडल सौर गांव के रूप में चुना जाएगा। शिमला के उपायुक्त अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में हुई जिला स्तरीय समिति की बैठक में लाभार्थियों की पहचान, विभागीय समन्वय और जन जागरूकता पर जोर दिया गया। डीसी कश्यप ने बताया कि यह योजना ग्रामीण घरों में सौर ऊर्जा लाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
कांगड़ा जिले के इंदौरा ब्लॉक में स्थित राजा खास गांव को हिमाचल का पहला मॉडल सौर गांव बनाने का निर्णय लिया गया है। 2000 से अधिक आबादी वाले इस गांव में सभी सार्वजनिक स्थानों जैसे पंचायत घर, स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र और आंगनबाड़ी को सौर ऊर्जा से संचालित किया जाएगा। इसके लिए केंद्र सरकार द्वारा एक करोड़ रुपये की विशेष ग्रांट प्रदान की जाएगी।
योजना के तहत, 2 किलोवाट तक की छत पर सौर ऊर्जा प्रणाली के लिए 60% सब्सिडी और 2-3 किलोवाट की प्रणाली के लिए 40% सब्सिडी दी जाएगी। इसके अलावा, पंचायतों को प्रत्येक छत पर सौर संयंत्र स्थापना के लिए 1,000 रुपये का प्रोत्साहन भी मिलेगा। यह आर्थिक सहायता ग्रामीण परिवारों के लिए बिजली बिल को शून्य या न्यूनतम करने में मदद करेगी।
हिमाचल प्रदेश में अब तक 1,54,497 लोगों ने पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत पंजीकरण कराया है, और 1,152 घरों में सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। यह योजना न केवल बिजली की लागत को कम कर रही है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दे रही है। सौर ऊर्जा से चलने वाले पंप और स्ट्रीट लाइट्स ग्रामीण क्षेत्रों में ऊर्जा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देंगे।
प्रदेश सरकार ने हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए अन्य योजनाएं भी शुरू की हैं। ‘ग्रीन पंचायत योजना’ के तहत 100 पंचायतों में 500 किलोवाट के सौर प्रोजेक्ट स्थापित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही, 500 किलोवाट तक के सौर पैनल लगाने पर 45% सब्सिडी दी जा रही है।
केंद्र सरकार की पीएम कुसुम योजना के तहत, हिमाचल में किसानों को सौर पंप उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जो सिंचाई लागत को कम करेंगे। यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद कर रही है।
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ने दावा किया है कि अगले कुछ वर्षों में राज्य पूरी तरह से हरित ऊर्जा राज्य बन जाएगा। इसके लिए सौर ऊर्जा के साथ-साथ अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
Disclaimer: यह लेख विभिन्न समाचार स्रोतों और सोशल मीडिया पोस्ट से प्राप्त जानकारी पर आधारित है। डेटा की सटीकता के लिए संबंधित सरकारी पोर्टल्स और प्रेस विज्ञप्तियों का उल्लेख किया गया है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे योजना का लाभ उठाने से पहले आधिकारिक स्रोतों से जानकारी सत्यापित करें।