“हिमाचल प्रदेश सरकार ने 2025 में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए नई सब्सिडी योजना शुरू की है। किसानों को प्राकृतिक गेहूं के लिए 60 रुपये प्रति किलो MSP, बीज वितरण, और साइलो निर्माण जैसी सुविधाएं मिलेंगी। हिम उन्नति योजना के तहत 2600 क्लस्टर स्थापित होंगे, जो स्थानीय जलवायु और मिट्टी के अनुकूल होंगे।”
हिमाचल में जैविक खेती के लिए नई सब्सिडी योजना
हिमाचल प्रदेश सरकार ने 2025 में जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए महत्वाकांक्षी सब्सिडी योजनाएं शुरू की हैं, जिसका उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना और पर्यावरण-अनुकूल खेती को प्रोत्साहित करना है। सरकार ने प्राकृतिक गेहूं की खरीद के लिए 60 रुपये प्रति किलोग्राम न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की घोषणा की है। यह कदम जैविक खेती को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
इस योजना के तहत, सरकार ने बीज वितरण को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रावधान किए हैं। किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले जैविक बीज उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे वे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम कर सकें। इसके अलावा, साइलो निर्माण के लिए सब्सिडी प्रदान की जाएगी ताकि जैविक उत्पादों का भंडारण बेहतर ढंग से हो सके और उनकी गुणवत्ता बनी रहे।
हिमाचल सरकार की हिम उन्नति योजना इस पहल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके अंतर्गत, प्रदेश भर में 2600 क्लस्टर स्थापित करने की योजना है, जिनमें से 1200 कृषि विभाग, 1100 प्राकृतिक खेती इकाई, और 300 जायका परियोजना के तहत बनाए जाएंगे। अब तक 286 क्लस्टर चिन्हित किए जा चुके हैं, और 186 में खरीफ 2023 से गतिविधियां शुरू हो चुकी हैं। ये क्लस्टर स्थानीय जलवायु, मिट्टी की गुणवत्ता, और भौगोलिक परिस्थितियों के आधार पर तैयार किए जा रहे हैं।
किसानों की सहायता के लिए सभी जिलों में कॉल सेंटर स्थापित किए जाएंगे, जहां वे अपनी समस्याओं का समाधान प्राप्त कर सकेंगे। इसके अलावा, दूध उत्पादन, दालें, मोटे अनाज, सब्जियां, फल, और नगदी फसलों के लिए विशेष क्लस्टर बनाए जाएंगे, जो क्षेत्र-विशेष की क्षमता के अनुरूप होंगे। सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि कृषि और पशुपालन विभाग की सभी मौजूदा योजनाओं को हिम उन्नति योजना से जोड़ा जाए ताकि किसानों को एकीकृत लाभ मिल सके।
हिमाचल में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने ट्रैक्टर और अन्य कृषि उपकरणों पर भी सब्सिडी की घोषणा की है। ट्रैक्टर जंक्शन के अनुसार, 2025 में ट्रैक्टर उद्योग में 10-11% की वृद्धि की उम्मीद है, और किसानों को बिना कुछ गिरवी रखे 2 लाख रुपये तक का लोन भी उपलब्ध कराया जाएगा। यह योजना छोटे और सीमांत किसानों के लिए विशेष रूप से लाभकारी होगी।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि ये योजनाएं न केवल किसानों की आय बढ़ाएंगी, बल्कि हिमाचल के पर्यावरण को भी सुरक्षित रखेंगी। जैविक खेती से मिट्टी की उर्वरता बनी रहेगी और रासायनिक प्रदूषण कम होगा। सरकार का लक्ष्य है कि 2025 तक हिमाचल को जैविक खेती का एक मॉडल राज्य बनाया जाए।
डिस्क्लेमर: यह लेख हिमाचल प्रदेश सरकार की आधिकारिक वेबसाइट, ट्रैक्टर जंक्शन, और अन्य विश्वसनीय स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर आधारित है। ताजा अपडेट के लिए संबंधित सरकारी पोर्टल्स की जांच करें।